Home Loan में FOIR क्या होता है और इसका रोल क्यों ज़रूरी है? जानिए पूरी जानकारी

Home Loan में FOIR क्या होता है और इसका रोल :- घर खरीदने का सपना हर किसी का होता है — लेकिन जब बात Home Loan की आती है, तो बैंक सिर्फ आपके सपनों को नहीं, आपकी Repayment Capacity को भी परखता है।

बहुत से लोगों को लगता है कि बस अच्छी Salary या Business Income से Loan आसानी से मिल जाएगा, लेकिन असल में बैंक का फैसला एक महत्वपूर्ण Ratio – FOIR (Fixed Obligation to Income Ratio) पर टिका होता है।

अब सवाल उठता है — ये FOIR होता क्या है और होम लोन में इसका इतना बड़ा रोल क्यों माना जाता है?
चलिए इसे आसान भाषा में समझते हैं 👇

 Bank Home Loan देने से पहले FOIR क्यों देखता है?

बैंक के लिए होम लोन देना एक बड़ा निवेश होता है। इसलिए वह यह जानना चाहता है कि जो व्यक्ति लोन ले रहा है, क्या वह हर महीने EMI समय पर चुका पाएगा या नहीं।

यह जानने के लिए बैंक आपकी monthly income और पहले से चल रहे खर्चों व लोन की EMI को देखकर FOIR Ratio निकालता है।
अगर यह Ratio ज्यादा है, तो बैंक को लगता है कि आपकी इनकम का बड़ा हिस्सा पहले से खर्चों में जा रहा है — यानी नया लोन चुकाने की क्षमता कम है।
इसीलिए, FOIR कम होने पर लोन मिलने की संभावना ज़्यादा होती है, जबकि ज्यादा FOIR होने पर लोन reject भी हो सकता है।

FOIR का पूरा मतलब क्या है? (Meaning of FOIR in Home Loan)

FOIR का Full Form है – Fixed Obligation to Income Ratio
इसका मतलब है – आपकी कुल मासिक आय का वह हिस्सा जो पहले से EMI, क्रेडिट कार्ड बिल, या अन्य फिक्स्ड खर्चों में जा रहा है।

साधारण भाषा में:

FOIR बताता है कि आपकी इनकम में से कितना हिस्सा पहले से खर्च हो रहा है और कितना बचता है नई EMI चुकाने के लिए।

FOIR कैसे Calculate किया जाता है? (FOIR Calculation Example)

बैंक FOIR निकालने के लिए एक आसान Formula अपनाता है 👇

Formula: –

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FOIR = (Existing Loan EMI + New Loan EMI) ÷ Monthly Income × 100

उदाहरण: – 

  • मान लीजिए आपकी Monthly Income ₹60,000 है,
  • पहले से ₹10,000 की Personal Loan EMI और ₹5,000 की Bike Loan EMI चल रही है।
  • अब आप ₹12,000 की Home Loan EMI लेना चाहते हैं।
  • तो FOIR होगा = (10,000 + 5,000 + 12,000) ÷ 60,000 × 100 = 45%

यानी आपकी इनकम का 45% हिस्सा EMI में जा रहा है।

FOIR Calculator

बैंक FOIR से कैसे तय करता है आपकी Home Loan Eligibility!

हर बैंक की एक FOIR Range होती है — आम तौर पर 40% से 60% के बीच। अगर आपका FOIR इस सीमा के अंदर है, तो बैंक को भरोसा होता है कि आपकी EMI आराम से कट सकती है।

लेकिन अगर आपका FOIR बहुत ज़्यादा है, तो बैंक सोचता है कि आपकी Income का बड़ा हिस्सा पहले से खर्चों में जा रहा है और नया लोन लेना Risky हो सकता है।

इसीलिए कई बार अच्छी Salary / Income होने के बावजूद भी Loan Reject हो जाता है।

FOIR ज़्यादा होने पर Home Loan क्यों Reject हो जाता है?

FOIR ज़्यादा होने का मतलब है कि आपकी repayment capacity कम है। बैंक को डर होता है कि भविष्य में EMI default हो सकती है।
इसलिए, FOIR अगर 60% से ऊपर है, तो बैंक लोन देने से कतराता है।

👉 सामान्य रूप से बैंक इस Ratio को ऐसे मानते हैं:

  • 40% तक – बेहतरीन, लोन आसानी से मिल सकता है
  • 41%–50% – ठीक-ठाक, थोड़ा रिस्क पर लोन मिल सकता है
  • 51%–60% – कमज़ोर स्थिति, बैंक अतिरिक्त जांच करेगा
  • 60% से ऊपर – High Risk, लोन रिजेक्ट होने की संभावना

Smart Ways to Reduce FOIR 

अगर आपका FOIR ज़्यादा है और आप चाहते हैं कि बैंक आपका होम लोन मंज़ूर करे, तो ये तरीके आज़माएं 👇

Quickly close your Running / Existing loan

छोटे-मोटे पर्सनल या वाहन लोन चुका देने से आपकी कुल EMI घट जाएगी और FOIR भी कम होगा।

Add Co-Applicant 

अगर आपके साथ किसी की इनकम जोड़ दी जाए (जैसे spouse या parents), तो total income बढ़ जाएगी और FOIR ratio नीचे आ जाएगा।

Loan Tenure बढ़ाएं 

लंबी अवधि का लोन लेने से EMI छोटी होती है, जिससे FOIR अपने आप कम हो जाता है।

Extra Income दिखाएं

बोनस, किराए की इनकम, या अन्य साइड इनकम भी FOIR कैलकुलेशन में जोड़ी जा सकती है। इससे आपकी repayment capacity मजबूत दिखती है।

Reduce Credit Card Usage

हर महीने का Credit Card Outstanding भी FOIR में गिना जाता है, इसलिए इसका उपयोग सीमित करें।

FOIR vs DTI – क्या दोनों एक ही हैं?

कई लोग FOIR और DTI (Debt to Income Ratio) को एक जैसा समझ लेते हैं, लेकिन दोनों में थोड़ा फर्क है।

FOIR सिर्फ फिक्स्ड Obligations (जैसे EMI, Loan Repayment) को ध्यान में रखता है।

जबकि DTI आपकी कुल देनदारियों को (credit card dues, personal expenses आदि) भी जोड़कर Ratio निकालता है।

होम लोन में बैंक FOIR को ज़्यादा महत्व देता है, क्योंकि यह आपकी actual EMI burden को दर्शाता है।

बैंक FOIR के साथ किन अन्य Factors को भी देखते हैं?

FOIR एक प्रमुख Factor है, लेकिन बैंक सिर्फ इसी पर निर्भर नहीं करते। वे Following Points पर भी ध्यान देते हैं 👇

  • आपका CIBIL Score (750+ होना बेहतर)
  • Job stability और Salary consistency
  • Existing liabilities
  • Age और loan tenure
  • Down Payment percentage

इन सभी को देखकर बैंक तय करता है कि आप लोन चुकाने में सक्षम हैं या नहीं।

Conclusion

 FOIR को समझना है तो इसे अपनी Financial Health की रिपोर्ट मानिए । Home Loan सिर्फ एक कागज़ी प्रक्रिया नहीं, बल्कि आपकी आर्थिक जिम्मेदारी की परीक्षा है।

अगर आप FOIR को समझकर अपनी finances को ठीक से manage करते हैं, तो न सिर्फ आपका लोन जल्दी पास होगा बल्कि EMI चुकाने में भी कभी दिक्कत नहीं आएगी।

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याद रखें:

“सपनों का घर वही बनाता है, जो अपनी EMI और FOIR दोनों को सही संतुलन में रखे।”

✍️ Quick Summary

FOIR = Fixed Obligation to Income Ratio

Ideal FOIR: 40%–50%

FOIR ज्यादा → Loan Approval मुश्किल

FOIR घटाने के लिए → EMI घटाएं, Co-applicant जोड़ें, पुराने लोन चुकाएं

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